Tuesday, May 6, 2008

मिलन

धरती पर गिरी थीं
शबनम की बूँदें
उस रात को,
सुबह देखा-
फूल खिले थे.


हृदय पर उतरी थी
तुम्हारी ही परछाईं,
उस दिन जब
पहली बार-
हम मिले थे.


2 comments:

PD said...

बहुत बढ़िया.. दिल को भा गई..

Divya. said...

verry nice ... even though i am not so good in hindi i could link it to your ideas i liked all the stuff ... contnue . good luck