Saturday, September 20, 2008

अश्क़ नहीं वो...

अश्क़ नहीं वो ख़्वाब है आँखों में
महका हुआ कोई गुलाब है आँखों में

ज़र्रा-ज़र्रा नूर की बारिश है
एक क़तरा माहताब है आँखों में

प्यार के फलसफे, प्यार की बातें
प्यार की खुली किताब है आँखों में

रूह हो जैसे प्यास की एक शमाँ
प्यासी-प्यासी-सी आब है आँखों में

लम्हा-लम्हा मासूमियत है, खामुशी है
गो लरजाँ एक सैलाब है आँखों में

उठ के झुकना, झुक के फिर उठना
हर एक अदा लाज़वाब है आँखों में


5 comments:

रंजना said...

वाह,बहुत ही सुंदर पंक्तिया हैं.ऐसे ही लिखते रहें.

Udan Tashtari said...

बहुत खूब!!

swati said...

bahut hi sundar varnan naynon ka

ashu said...

बहुत खूब लिखे हो..
लिखते रहना..
Although i'm not able to understand properly i can make out the meaning in it..keep it up

Dr. Nazar Mahmood said...

bohot badhiya
lage raho