बारहा सन्नाटों की आवाज़ ग़ज़ल बन जाती है...!!!
कल 27/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!
हौसला-अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया यशवंत जी...
kitna dard hai in lafjon me..bahut achcha likhte ho.god bless you.mere blog par bhi aana...silsila badhta rahe.i m following you.
वाह ...बहुत खूब
मुन्तजिर रहकर एक उम्र काट दी मैंनेकिसी ने मगर, इस तरफ निगाह न किया क्या खूब....
good expression.
मेरे दोस्त ! ख़ुशी से भी निबाहने की क्या उम्मीद लगाते हो..?उसकी जर्रेनावाज़ी है की कभी कभी मिल भी लेती है...इतनी संगदिल दुनिया में.वरना उन् दो पलों के सिवा और रखा ही क्या है..यादों के गुंचे में...?
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8 टिप्पणियाँ:
कल 27/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
हौसला-अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया यशवंत जी...
kitna dard hai in lafjon me..
bahut achcha likhte ho.god bless you.mere blog par bhi aana...silsila badhta rahe.i m following you.
वाह ...बहुत खूब
मुन्तजिर रहकर एक उम्र काट दी मैंने
किसी ने मगर, इस तरफ निगाह न किया
क्या खूब....
good expression.
मेरे दोस्त ! ख़ुशी से भी निबाहने की क्या उम्मीद लगाते हो..?
उसकी जर्रेनावाज़ी है की कभी कभी मिल भी लेती है...इतनी संगदिल दुनिया में.
वरना उन् दो पलों के सिवा और रखा ही क्या है..यादों के गुंचे में...?
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