Thursday, November 27, 2008

प्यास का समन्दर है के...

प्यास का समन्दर है के समन्दर की प्यास है
एक दिल है मेरा और वो भी उदास है

मुद्दत से एक क़तरा खुशबू आँखों में है
एक दर्द-सा कहीं दिल के आस-पास है

अपने ही लहू से तर कोई गुलाब हो जैसे
तमन्ना के खूँ से तर दिल का लिबास है

बतौर इल्ज़ाम ही सही मगर सच कहते हैं लोग
इक अहसास के सिवा और क्या इस दिल के पास है


2 comments:

"अर्श" said...

अपने ही लहू से तर कोई गुलाब हो जैसे
तमन्ना के खूँ से तर दिल का लिबास है

achha likh rahe hai aap jari rahe .. jyda padhe jyada likhen.... dhero sadhuwad....

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

बहुत सुंदर रचना..