Sunday, June 1, 2008

जब भी देखोगे मुझे...

जब भी देखोगे मुझे इसी हाल में पाओगे,
आँख में आँसू, लबों1 को हँसता हुआ पाओगे

तुम्हारा तो खैर यकीन2 है मुझे खुद से ज्यादा,
आँसू दिया है जब आज तो कल भी रुलाओगे

मेरा क्या है? एक अदना3-सा आदमी ही तो हूँ
आखिर कब तक मुझे तुम याद रख पाओगे?

मुझे तो अपनी ख़ाक4 पर भी कोई हक़ नहीं,
हर उम्मीद है झूठी, क्यों कोई उम्मीद दिलाओगे?

1. होंठों 2. विश्वास 3. तुच्छ 4. राख, धूल


4 comments:

Archana said...

Bhaiyya , aap jo bhi likhte hain bas lagta hai kahin hum bhi yahi soch rahe hain... aisa kaise? der hi sahi par ... aapke posts ki bauchaar hoti hai..

PD said...

आज 2-4 दिनों के बाद तुम्हारे चिट्ठे पर आया.. देखा ढेर सारी पोस्ट.. भई वाह मजा आ गया.. बहुत बढिया.. लगे रहो.. :)

रश्मि said...

आँसू दिया है जब आज तो कल भी रुलाओगे
ye jaruri to nahi.

क्षितीश said...

हाँ, जरूरी तो नहीं पर जब उम्मीद और फ़ितरत ही ऐसी हो किसी की तो फिर क्या किया जाये...???