Saturday, June 2, 2012

रोशनी क़तरा-क़तरा...

रोशनी क़तरा-क़तरा, बिखरा कू-ब-कू 
मद्धम होके चाँद भी, तुझसा लगे हू-ब-हू 

साँस बहकी-बहकी, नज़र लहकी-लहकी 
होश भी हो खफा, तू जो आए रू-ब-रू 

खुशबू भीनी-भीनी, हँसी झीनी-झीनी 
हर सिम्त तू ही दिखे, महके तू-ही-तू 

ज़िस्म धनक-धनक, रूह फ़लक-फ़लक 
रंग तेरा, नूर तेरा, बाकी मैं हूँ-ना-हूँ 

कू-ब-कू = हर गली, every side; रू-ब-रू = आमने-सामने, face to face; 
सिम्त = तरफ, side; धनक = इन्द्रधनुष, rainbow; फ़लक = आकाश, sky  



1 comment:

expression said...

वाह....
लाजवाब गज़ल.....
बहुत अच्छी लगी.

अनु